Published On: Sun, Nov 27th, 2016

Annual General Meeting of NRMU held at Ambala on 24-26, Nov. 2016

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अम्बाला:- महामंत्री कामरेड शिव गोपाल मिश्र ने कहा कि सरकार ने हड़ताल से बचने के लिए उनकी मांगों को तीन कमेटियों में से एक के पास भेजने और कुछ महीने के भीतर रिपोर्ट आने पर उसे लागू करने के लिए चार माह का समय मांगा था। यह समय बीतने वाला है और अभी तक सरकार ने कर्मचारियों की जायज लंबित मांगों के समाधान की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि नार्दन रेलवे मेन्स यूनियन ने अपने इस 68वें वार्षिक सम्मेलन के द्वारा अपने सभी मंडलों, शाखाओं, पदाधिकारियों और सक्रिय कार्यकर्ताओं से आह्वान किया है कि आल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन 14 दिसंबर को विभिन्न कार्य स्थलों पर धरना, प्रदर्शनी और रैली करके विरोध जताया जाएगा। यूनियन सातवें वेतन आयोग से संबंधित समस्याओं के समाधान और रेल कर्मचारियों की जायज लंबित मांगों के समाधान के लिए सधन जन जागरण अभियान के माध्यम से अखिल भारतीय विरोध दिवस पूरजोर तरीके से मनाएगी। इसके अलावा सातवें वेतन आयोग की पेश की गई रिपोर्ट रेल कर्मियों की कतई मंजूर नहीं है।  रेलवे का निजीकरण भी किसी कर्मचारी को मंजूर नहीं है। तय समय में उनकी मांगे नहीं मानी गई और वेतन में सुधार न हुआ तो हम संघर्ष को तैयार है। इसके अलावा 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट के आप्शन एक को सरकार ने कमेटी को सौंप दिया है जोकि गलत ही नहीं सिद्धांतों के परे भी है। यदि दिसंबर तक सरकार ने रेल कर्मियों की मांगे नहीं मानी तो दिसंबर के बाद रेल कर्मचारी संघर्ष करेंगे।जागरण संवाददाता, केंद्रीय सरकारी कर्मचारी का न्यूनतम वेतन का मामला अभी तक न हल हुआ है न ही हम शांत है। बीते 11 जुलाई को होने वाली हड़ताल केवल चार महीने के लिए स्थगित की गई थी। हमारी वार्ता और तैयारी दोनों चल रही है। सरकार द्वारा तय की गई सीमा में भी हमारी मांगे अभी तक पूरी नहीं हुई है। यहीं कारण है कि आल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन ने 14 दिसंबर को भारतीय रेलों पर अखिल भारतीय विरोध दिवस मनाने का निर्णय लिया गया है। यह बाद फेडरेशन के महामंत्री शिव गोपाल मिश्र ने अंबाला छावनी में 68वें वार्षिक अधिवेशन से पूर्व आयोजित प्रेसवार्ता में कहीं। महामंत्री कामरेड शिव गोपाल मिश्र ने कहा कि सरकार ने हड़ताल से बचने के लिए उनकी मांगों को तीन कमेटियों में से एक के पास भेजने और कुछ महीने के भीतर रिपोर्ट आने पर उसे लागू करने के लिए चार माह का समय मांगा था। यह समय बीतने वाला है और अभी तक सरकार ने कर्मचारियों की जायज लंबित मांगों के समाधान की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि नार्दन रेलवे मेन्स यूनियन ने अपने इस 68वें वार्षिक सम्मेलन के द्वारा अपने सभी मंडलों, शाखाओं, पदाधिकारियों और सक्रिय कार्यकर्ताओं से आह्वान किया है कि आल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन 14 दिसंबर को विभिन्न कार्य स्थलों पर धरना, प्रदर्शनी और रैली करके विरोध जताया जाएगा। यूनियन सातवें वेतन आयोग से संबंधित समस्याओं के समाधान और रेल कर्मचारियों की जायज लंबित मांगों के समाधान के लिए सधन जन जागरण अभियान के माध्यम से अखिल भारतीय विरोध दिवस पूरजोर तरीके से मनाएगी। इसके अलावा सातवें वेतन आयोग की पेश की गई रिपोर्ट रेल कर्मियों की कतई मंजूर नहीं है।  रेलवे का निजीकरण भी किसी कर्मचारी को मंजूर नहीं है। तय समय में उनकी मांगे नहीं मानी गई और वेतन में सुधार न हुआ तो हम संघर्ष को तैयार है। इसके अलावा 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट के आप्शन एक को सरकार ने कमेटी को सौंप दिया है जोकि गलत ही नहीं सिद्धांतों के परे भी है। यदि दिसंबर तक सरकार ने रेल कर्मियों की मांगे नहीं मानी तो दिसंबर के बाद रेल कर्मचारी संघर्ष करेंगे।

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