Published On: Thu, Mar 15th, 2018

AIRF Working Committee Meeting – Interaction with Expert Group of ITF on Privatization

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अंतरराष्ट्रीय ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन ने कहा, विश्वभर में इसके बाद परिणाम अच्छे नहीं रहे हैं, निजीकरण को लेकर भारतीय रेल को सचेत किया, पीपीपी निवेश सबसे महंगा सौदा, श्री अश्विनी लोहानी चेयरमैन रेलवे बोर्ड ने मीटिंग विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की

अंतरराष्ट्रीय ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (आईटीएफ) के विशेषज्ञों ने भारतीय रेल को सचेत किया है कि विश्वभर में रेलवे के निजीकरण के परिणाम अच्छे नहीं रहे हैं। पूर्ण अथवा आंशिक निजीकरण के बाद रेलकर्मियों, उपभोक्ताओं दोनों को नुकसान हुआ। बुनियादी ढांचा कमजोर हुआ है। इसलिए सरकारी निवेश की पटरी पर रेलवे का आधुनिकीकरण करना उचित रहेगा। ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडेरशन की ओर से भारतीय रेल में निजीकरण और रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन को लेकर परिचर्चा का आयोजन किया। इसमें अंतरराष्ट्रीय ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन के विशेषज्ञ दल ने हिस्सा लिया। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्विनी लोहानी भी मौजूद थे। आईटीएफ दुनियाभर में परिवहन क्षेत्र में काम करने वाले कर्मियों का संगठन है, इसमें भारत सहित 147 देशों के 90 लाख सदस्य हैं। एआईआरएफ इसका पुराना सदस्य रहा है। आईटीएफ विशेषज्ञ दल में शामिल ब्रिटेन के एसोसिएटेड सोसाइटी ऑफ लोकोमोटिव इंजीनियर्स एंड फायरमैन के सिमॉन वेलेर ने बताया, वह लंदन ट्यूब ट्रेन के लोको पायलट हैं। ब्रिटेन में पीपीपी के जरिये निजीकरण किया गया। डेढ़ दशक बाद भी लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका है।

इस मौके पर कामरेड शिव गोपाल मिश्र महामंत्री/AIRF ने मीटिंग में आने पर श्री अश्विनी लोहानी/CRB का स्वागत किया और ITF के एक्सपर्ट ग्रुप का विशेष रूप से भारत आने पर स्वागत करते हुए धन्यवाद किया। उन्होंने आगे कहा कि रेलवे में निजीकरण खतरे की घंटी है और वर्कर के हित में नहीं है, इससे शोषण और मुनाफाखोरी को बढ़ावा मिलेगा। श्री अश्विनी लोहानी ने भरोसा देते हुए कहा कि रेलवे में मजदूरों के हितों का ध्यान रखते हुए निति निर्धारण किया जायेगा। उन्होंने AIRF और ITF के सुझावों के लिए धन्यवाद किया।

यूरोपियन ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडेरशन की उप महासचिव सेबाइन ट्रीयर, आईटीएफ की शहरी ट्रांसपोर्ट कमेटी के अध्यक्ष अस्बजोर्न वाहफ, अर्जेटीना रेलवे के अडोल्फो सोसा ने कहा, पीपीपी निवेश सबसे महंगा सौदा होता है। इसमें साङोदार को ब्याज चुकाने के साथ मुनाफा भी मिलता है। सरकारी निवेश करने पर ब्याज ही जाता है, मुनाफा साझा करने की जरूरत नहीं पड़ती है, मुनाफा खाते में आता है।

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