Published On: Sun, Sep 1st, 2019

Anti labour policies criticized in standing committee meeting of AIRF

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आँल इंडिया रेलवे  मेन्स फैडरेशन की स्टैंडिग कमेटी की बैठक  में सरकार के श्रमिक विरोधी रवैये की निंदा की गई और सर्वसम्मति से तय हुआ कि इसके लिए देशव्यापी विरोध की शुरुआत की जानी  चाहिए। सरकार को ऐसा सख्त संदेश देना होगा कि जिससे निगमीकरण और निजीकरण से पीछे हटने के लिए मंत्रालय मजबूर हो जाए। इस बैठक  में यूनियन की मान्यता के चुनाव को लेकर भी जोनवार समीक्षा की गई।

स्टैंडिग कमेटी की अध्यक्षता कर रहे फैडरेशन के अध्यक्ष रखालदास गुप्ता ने मौजूदा हालातों की विस्तार से चर्चा की और कहाकि वैसे तो फैडरेशन पहले से कर्मचारियों को आगाह करता रहा है कि केंद्र सरकार की नीतियां पूरी तरह मजदूर विरोधी है, उसके हर फैसले कारपोरेट क्षेत्र को फायदा पहुंचाने वाला होता है। श्री गुप्ता ने कहाकि ऐसा  नहीं है कि मौजूदा सरकार ही भारतीय रेल के निजीकरण और निगमीकरण का प्रस्ताव ले आई है, सच  तो ये  है कि वर्ष 1991 के बाद की लगभग सभी पुरानी सरकारों का भी यही रवैया रहा है, लेकिन कर्मचारियों की ताकत के आगे हर सरकार को झुकना पडा है।

सौ दिन की कार्ययोजना के जरिए एक बार फिर भारतीय रेल को निशाना बनाया जा रहा है, सरकार की कोशिश है कि उत्पादन इकाइयों और कारखानों  का निगमीकरण के साथ ही भारतीय रेल का आंशिक तौर पर निजीकरण किया जाए। अध्यक्ष ने कहाकि आज तक रेल कर्मचारियों को जो भी सुविधाएं मिल रही है, वो एक लम्बी लड़ाई के बाद हासिल की गई है। तीन ऐतिहासिल हड़ताल के जरिए आँल इंडिया रेलवे  मेन्स फैडरेशन ने बहुत कुछ हासिल किया है।

महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने कहाकि 100 दिन की कार्ययोजना जारी होने के बाद से ही फैडरेशन द्वारा लगातार रेलवे बोर्ड पर दबाव बनाया गया है, इसके परिणाम स्वरूप पूरी तरह तो नही, लेकिन कुछ हद तक सरकार को विवश किया गया है । महामंत्री ने कहाकि एआईआरएफ के आह्वान पर देश भर में काला दिवस मनाया गया, परिणामस्वरूप अगले ही दिन चेयरमैन रेलवे बोर्ड का बुलावा आया और फुलबोर्ड की बैठक में साफ कर दिया गया कि फैडरेशन निजीकरण और निगमीकरण के खिलाफ है। अगर ऐसा कोई भी काम किया गया तो देश भर में रेल का चक्का जाम करने से भी हम पीछे रहने वाले नहीं है। इसी बैठक  में चेयरमैन ने कहाकि सरकार के प्रस्ताव को स्टडी के लिए भेजा गया है, जब तक रिपोर्ट न आ जाए, इस पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता, लेकिन चेयरमैन ने साफ कर दिया कि स्टडी रिपोर्ट आने के बाद यूनियन के साथ बात होगी और उसके बाद ही कोई निर्णय होगा।

महामंत्री ने स्टेडिंग कमेटी में कहाकि  देश भर की प्रोडक्शन यूनिट के नेताओं की भी दिल्ली में मीटिंग हुई, इस मीटिंग में सभी के साथ चर्चा करने के बाद एक बैठक  चेयरमैन रेलवे बोर्ड के साथ भी कराई गई, जिससे किसी के मन में किसी तरह की दुविधा न हो। महामंत्री ने कहाकि सरकार रायबरेली में माडर्न कोच फैक्टरी का निगमीकरण पहले करना चाहती है, हमारा मत है कि लातूर में एक  कोच फैक्टरी का निर्माण प्रस्तावित है, अगर प्रयोग के तौर पर निगमीकरण करना है तो चलती हुई कोच फैक्टरी के बजाए लातूर की प्रस्तावित फैक्टरी का निगमीकरण करें, जिससे उनकी क्षमता का पता भी चल जाएगा। जब देश की उत्पादन इकाइयां कम कीमत में कोच और इंजन का निर्माण कर रही हैं और अपना लक्ष्य भी पूरा कर रही है, फिर निगमीकरण की बात करना बेमानी है।

यूनियन की मान्यता को लेकर महामंत्री ने कहाकि सच्चाई ये है कि सरकार को डर है कि अगर चुनाव कराया गया तो आँल इंडिया रेलवे मेन्स फैडरेशन की ताकत और बढ़ जाएगी, जिस संगठन को वो लाना चाहते है, उसका तो कोई नाम लेने वाला भी नहीं है, बस यही वजह है कि चुनाव को बेवजह टाला जा रहा है। हालाकि महामंत्री ने ये भी कहाकि काफी प्रयास और दबाव के बाद माडलिटीज तो जारी कर दी गई है, हमे उम्मीद है कि सितंबर के तीसरे सप्ताह में चुनाव की अधिसूचना जारी कर अक्टूबर में चुनाव हो सकता है। ऐसे  में हमें अपनी तैयारियों को पुख्ता रखना होगा।  महामंत्री ने जोनवार चुनावी तैयारियों की भी समीक्षा की, कुछ जोन को मेम्बरशिप बढ़ाने के आदेश दिए गए।

महामंत्री ने कहाकि आज भारतीय रेल में युवा रेलकर्मचारियों की संख्या काफी अधिक है, लिहाजा हमें युवाओं को आपने साथ जोड़ना ही होगा। एजूकेशन प्रोग्राम को लेकर नेशनल कमेटी के गठन की जानकारी देने के साथ ही महामंत्री ने कहाकि आप सभी ने जोनल कोआर्डिनेटर बना दिए है, अब जरूरी है कि लक्ष्य के मुताबिक समय  समय पर जोन, मंडल और शाखास्तर एजूकेशन के प्रोग्राम भी आयोजित किए जाएं।

स्टैंडिग कमेटी की बैठक को कार्यकारी अध्यक्ष एन कन्हैया, कोषाध्यक्ष जे आर भोसले, राजा श्रीधर , के एल गुप्ता, शंकरराव, मुकेश माथुर, मुकेश गालव, आर  डी यादव, पी जे शिंदे,  बसंत चतुर्वेदी, एल एन पाठक, एसएन पी श्रीवास्तव, आर सी शर्मा, गौतम मुखर्जी,  सुदीप बंदोपाध्याय, मनोज बेहरा, डिक्रूज एंथोनी, जया अग्रवाल और महेन्द्र श्रीवास्तव समेत कुछ और लोगों  ने संबोधित किया।

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